इन्फ़ोसिस फाउंडेशन ने आरोहण सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स की तीन श्रेणियों: शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी, में विजेताओं को सम्मानित कर उन्हें पुरस्कार दिया है।
इस साल, हमें देश के सभी 28 राज्यों से 2065 एंट्रीज़ प्राप्त हुईं| विजेताओं को एक प्रतिष्ठित ज्यूरी पैनल द्वारा चुना गया, जिसमें शामिल थे
राहुल सुरेश बाकरे और विनीत मोरेश्वर फडणीस
इनोवेशन: बोरचार्जर
श्रेणी – एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी
भारत में भूजल की कमी एक ऐसी समस्या है जो जलवायु परिवर्तन के कारण साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। बोरचार्जर एक स्मार्ट रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (RWH) तकनीक है जो कम पानी दे रहे या सूखे बोरवेल को रीचार्ज और पुनर्जीवित करती है।
ये दुनिया की पहली रोबोटिक, आर्टिफ़िशियल बोरवेल रीचार्ज तकनीक है जो मौजूदा बोरवेल में हर साल 4 से 80 लाख लीटर वर्षा जल भर सकती है। इससे ये सुनिश्चित होता है कि किसान पर जलवायु परिवर्तन का असर ना हो, सिंचाई, कृषि उत्पादन और किसानों की आय में सुधार हो, और पीने के पानी की मात्रा और क्वालिटी बेहतर बने।
चितरंजन सिंह और रॉबिन सिंह
इनोवेशन: क्लुइक्स C012
श्रेणी - स्वास्थ्य सेवा
क्लुइक्स C012 एक मल्टी-पैरामीटर वॉटर क्वालिटी एनलाइज़र है जो इस्तेमाल में आसान, किफ़ायती और पोर्टेबल है।
विश्व में, हर दो में से एक व्यक्ति, यानी आधी आबादी पर असुरक्षित पेयजल का असर होता है। पानी की गुणवत्ता जाँचने के पारंपरिक तरीके महंगे और कम असरदार होते हैं जिससे लगभग 4 बिलियन लोग खराब क्वालिटी वाले पानी से असुरक्षित हैं।
क्लुइक्स C012 एक पोर्टेबल, AI और IoT वाला वॉटर क्वालिटी एनालाइज़र है जो तुरंत GPS-टैग्ड रिपोर्ट देता है और 14 प्रमुख पैरामीटर्स की जाँच करके 30 मिनिट से भी कम समय में पानी से होने वाले रोगों का पता लगाता है। उपयोगकर्ता को ध्यान में रखकर बनाया गया ये उपकरण, शहरी और ग्रामीण दोनों जगहों पर पानी की भरोसेमंद जाँच को किफ़ायती, आसान और सस्टेनेबल बनाता है।
राजेश ए. राव, दीपा एल. बी. राजीव और रवींद्र एस. राव
इनोवेशन: कनेक्टिंग द डॉट्स
श्रेणी – शिक्षा
कनेक्टिंग द डॉट्स का मकसद है हाई क्वालिटी STEM शिक्षा इंटरवेंशंस की मदद से सरकारी स्कूलों के छात्रों की शिक्षा को एक नया रूप देना।
सामाजिक, आर्थिक और भाषा की रुकावटों के कारण, देश भर में लाखों छात्र अच्छी शिक्षा हासिल नहीं कर पाते और कुशल, प्रेरित शिक्षकों की कमी भी उनकी शिक्षा में बाधा का कारण बन जाती है।
कनेक्टिंग द डॉट्स छात्रों और शिक्षकों के लिए इंटरैक्टिव, एडेप्टिव, एक्स्पिरियंशियल और एंगेजिंग AI हाइब्रिड प्रोग्राम के ज़रिए इस बाधा को दूर कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र पर दोतरफा असर डालने वाली समस्याओं का समाधान करके, कनेक्टिंग द डॉट्स छात्रों के शैक्षणिक नतीजों को बेहतर बनाने और उनकी सोचने की क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
फाल्गुन मुकेश व्यास
इनोवेशन: सुकून
श्रेणी - स्वास्थ्य सेवा
सुकून आरामदायक पहनावे के भविष्य में क्रांति ला रहा है। काम के दौरान अत्यधिक तापमान एक हक़ीक़त और व्यापक समस्या है जिसका सामना कई सेक्टर के कर्मचारियों को करना पड़ता है, और जिसका असर औद्योगिक उत्पादन और कर्मचारियों की सेहत पर पड़ता है।
सुकून के इनोवेटिव कूलिंग परिधान जैसे डिजिटल हाइब्रिड IDEC मेकेनिज़्म पर आधारित स्मार्ट जैकेट अत्यधिक ताप वाली जगहों में पहनने पर ठंडक देते हैं और पहनने वाले के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण का ख्याल रखते हुए उत्पादकता बेहतर बनाते हैं।
सौम्या एस और पल्लवी कुलकर्णी
इनोवेशन: प्रोजेक्ट बिंदु
श्रेणी – शिक्षा
प्रोजेक्ट बिंदु दिव्यांग लोगों को सम्मानपूर्वक जीने और काम करने के लिए सशक्त बना रहा है। रोज़गार के मामले में दिव्यांगजनों को कई रुकावटों का सामना करना पड़ता है और इसीलिए वो आर्थिक कमज़ोरी के चक्रव्यूह में फँसे रहते हैं।
प्रोजेक्ट बिंदु दिव्यांगजनों के लिए रिमोट, टेक-एनेबल्ड वर्क इकोसिस्टम्स तैयार करते हैं और बदले में वो वृद्धजनों की देखभाल, बैकएंड सपोर्ट, डेटा हैंडलिंग और कोऑर्डिनेशन करते हैं जिससे वो आर्थिक स्वतंत्रता और इनक्लूजन हासिल कर सकते हैं।
नेहा पंचमीया और नचिकेत उत्पात
इनोवेशन: कॉम्प्रिहेंसिव वाइल्डलाइफ़ मैनेजमेंट
श्रेणी – एनवायर्नमेंटल सस्टेनेबिलिटी
कॉम्प्रिहेंसिव वाइल्डलाइफ़ मैनेजमेंट (CWM) एक वेब-आधारित प्लैटफ़ॉर्म है जो वन्यजीवों के बचाव, उपचार, पुनर्वास और रिहाई संबंधित डेटा तैयार और मैनेज करता है।
CWM वन हेल्थ अप्रोच के ज़रिये पशु, मानव और पर्यावरण की सेहत को एक करता है जिससे उनपर नियंत्रण, रोग की निगरानी और ख़तरे पर ध्यान देना सहज होता है। सभी वन्यजीव सुविधाओं में मापनीय, CWM ट्रांसपेरेंसी, एकाउंटेबिलिटी और डेटा-आधारित निर्णयों को बढ़ावा देता है ताकि भारत की वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण क्षमता को प्रोत्साहित किया जा सके।
अनिर्बान पालीत, डॉ. सायंतनी प्रमाणिक और पलना पटेल
इनोवेशन: सर्वीचेक
श्रेणी - स्वास्थ्य सेवा
सर्वीचेक भारत की पहली CDSCO प्रमाणित, घर पर ही HPV (ह्यूमन पेपिलोमावाइरस) जाँच के लिए सेल्फ़-सैम्पलिंग किट है।
भारत में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण है सर्वाइकल कैंसर। हर साल 80,000 से ज़्यादा महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु होती है, जबकि शुरुआती दौर में निदान होने पर इसका इलाज हो सकता है।
भारत में सर्वाइकल जाँच में होने वाली पीड़ा, फॉलो-अप की फ़िक्र और समय-समय पर स्क्रीनिंग कैम्प्स तक पहुँचने की मुश्किलों के चलते सिर्फ़ 1% आबादी ही जाँच करवा पाती है।
सर्वीचेक सुरक्षित और उपयोग में आसान है, जो सर्वाइकल कैंसर के निदान को हर महिला के घर तक पहुँचाता है, जिससे समय पर उचित कार्रवाई की जा सके।
नागराजन राजगोपाल, विद्या वाई और सुप्रिया दे
इनोवेशन: हेक्सिस और आइरिस
श्रेणी – शिक्षा
हेक्सिस और आइरिस सहायक प्रौद्योगिकी प्रोडक्ट्स हैं जो दृष्टिहीन स्कूली छात्रों के लिए STEM शिक्षा को बराबरी का और मज़ेदार बनाते हैं।
भारत में 11 लाख स्कूली बच्चे देख नहीं सकते और 11.5% बच्चे शिक्षा पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसका एक मुख्य कारण ये है कि पारंपरिक शिक्षा छपी हुई सामग्री जैसे टेक्स्टबुक्स, वर्कशीट्स, डायग्राम्स आदि पर बहुत ज़्यादा निर्भर है जिनका दृष्टिहीन छात्रों के लिए कोई फ़ायदा नहीं हैं।
हेक्सिस बच्चों के लिए तैयार किया गया एक रिफ़्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले है जो किसी भी लिखित पाठ को तुरंत ब्रेल में उपलब्ध कराता है, वहीँ आइरिस ऐसा उपकरण है जो ऑडियो के साथ डायग्राम को समझने के लिए बनाया गया है। दोनों उपकरणों को टीचर कंटेंट क्लाउड प्लैटफ़ॉर्म अंतरा के साथ जोड़ा गया है। ये दोनों ही स्पेशल और इन्क्लुज़िव स्कूलों में दृष्टिहीन बच्चों की पढ़ाई के तरीके बदल रहे हैं।
अभिजीत रे, को-फ़ाउंडर, यूनिटस कैपिटल एंड यूसी इंक्लूज़िव क्रेडिट
अभिजीत रे का मानना है कि आरोहण सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स सोशल एंटरप्रेन्योर इकोसिस्टम में बदलाव की निशानी हैं। सोशल इनोवेटर्स के लिए उनका सुझाव है कि वो याद रखें कि भारत में हर समस्या व्यापक होती है, इसलिए काम की योजना बनाते वक़्त ज़रूरी है कि वो स्केल का ख्याल रखें और काम के लिए पर्याप्त समय भी दें।
अलीना आलम, फ़ाउंडर, मिट्टी कैफ़े
आज समाज में सोशल इनोवेशन एक ज़रूरी भूमिका क्यों निभाता है इसकी वजह बताने के साथ ही अलीना आलम कहती हैं कि इस साल के आरोहण अवॉर्ड्स में करुणा और हिम्मत की कहानियों ने सभी ज्यूरी मेंबर्स को प्रभावित किया। सोशल इनोवेटर्स को अपने सफ़र में मज़बूती कैसे बनाए रखनी है इस पर उनके सन्देश के लिए वीडियो देखें।
अपर्णा उप्पलुरी, फाउंडर और प्रिंसिपल एडवाइज़र, अंतरा एडवाइज़री
अपर्णा उप्पलुरी का मानना है कि इनोवेशन को देखने का हमारा नज़रिया बदलने में आरोहण अवॉर्ड्स हमारी मदद करते हैं - एक टेक्नोलॉजिकल नज़रिये से हटकर सोशल प्रॉब्लम को सुलझाने के तरीके तक। वो ख़ास तौर से उन इनोवेटर्स के काम से प्रभावित हुईं जिन्होंने अपने अनुभवों से प्रभावित होकर सामाजिक समस्याओं का सुझाव निकला।
सुमित विरमानी, ट्रस्टी, इंफ़ोसिस फ़ाउंडेशन
सुमित विरमानी ने बताया कि किस तरह आरोहण अवॉर्ड्स एक सपने से बढ़कर अब इंफ़ोसिस फ़ाउंडेशन की एक ख़ास पहल बन गई हैं। उन्होंने एंट्रीज़ में नज़र आ रही काम की अविश्वसनीय गहराई पर गौर किया और पानी बचाने और महिलाओं की भलाई से जुड़े नवाचार ने उनका ध्यान आकर्षित किया। वो चाहते हैं कि सोशल एंटरप्रेन्योर्स स्केल को ध्यान में रखेंगे तभी उनका काम असली असर डाल पाएगा।
सुनील धारेश्वर, ट्रस्टी, इंफ़ोसिस फ़ाउंडेशन
सुनील धारेश्वर को ये देखकर खुशी हुई कि इस साल के आरोहण अवॉर्ड्स की एंट्रीज़ में AI सहित ज़्यादा टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। क्लाइमेट चेंज, EV बैटरी और वेयरेबल्स के क्षेत्र में इनोवेशन्स में ख़ास तौर पर उन्हें दिलचस्पी हुई। उन्होंने इनोवेटर्स को सलाह दी कि वो जोश, मक़सद और समाज की भलाई को ध्यान में रखकर ही इनोवेशंस करें।